Shopping Cart Empty!

    More Views

    • GEETA DARSHAN 1 TO 8

    GEETA DARSHAN 1 TO 8 [Hindi]

    Be the first to review this product

    Availability: In stock

    Rs. 7,500.00
    OR

    Quick Overview

    कृष्ण एक गहन समन्वय हैं। उन्होंने भारत में जो भी जाना था तब तक, उस सभी को गीता में समाविष्ट कर लिया है। उनका किसी से कोई विरोध नहीं है। वे सभी के भीतर सत्य को खोज लेते हैं।

    इसलिए गीता सार-ग्रंथ है। वेद को अगर भूल जाओ, तो चलेगा। क्योंकि जो भी वेद में सार है, वह गीता में आ गया। महावीर विस्मृत हो जाएं, चलेगा। क्योंकि महावीर का जो भी सार है, वह गीता में आ गया। सांख्य शास्त्र न बचे, चलेगा। गीता में सारी बात महत्व की आ गई है।
    अगर भारत के सब षास्त्र खो जाएं, तो गीता पर्याप्त है। कोई भी प्रज्ञावान पुरुष गीता से फिर से सारे शास्त्रों को निर्मित कर सकता है। गीता में सारे सूत्र हैं। तो गीता निचोड़ है।
    गीता अकारण ही करोड़े लोगों के हृदय का हार नहीं हो गई है; अकारण ही नहीं हो गई है।...
    और जो मैंने कहा उससे गीता अत्याधुनिक हो जाती है; बीसवीं सदी की घटना हो जाती है। अब पिछले पांच हजार साल को हम भूल सकते है। जो मैंने कहा है, उसने गीता के पुराने पड़ते रूप को एकदम अत्याधुनिक कर दिया। इन पांच हजार सालों में जो भी घटा है, मनुष्य की चेतना ने जो नई-नई करवटें ली हैं, नई-नई करवटें ली हैं, नई-नई विधाएं खोजी हैं, मनुष्य की चेतना ने जो नये अनुभव किए हैं, उन सबको मैंने समाविष्ट कर दिया है। अब गीता को नया खून मिल गया।

    Details

    कृष्ण एक गहन समन्वय हैं। उन्होंने भारत में जो भी जाना था तब तक, उस सभी को गीता में समाविष्ट कर लिया है। उनका किसी से कोई विरोध नहीं है। वे सभी के भीतर सत्य को खोज लेते हैं। इसलिए गीता सार-ग्रंथ है। वेद को अगर भूल जाओ, तो चलेगा। क्योंकि जो भी वेद में सार है, वह गीता में आ गया। महावीर विस्मृत हो जाएं, चलेगा। क्योंकि महावीर का जो भी सार है, वह गीता में आ गया। सांख्य शास्त्र न बचे, चलेगा। गीता में सारी बात महत्व की आ गई है। अगर भारत के सब षास्त्र खो जाएं, तो गीता पर्याप्त है। कोई भी प्रज्ञावान पुरुष गीता से फिर से सारे शास्त्रों को निर्मित कर सकता है। गीता में सारे सूत्र हैं। तो गीता निचोड़ है। गीता अकारण ही करोड़े लोगों के हृदय का हार नहीं हो गई है; अकारण ही नहीं हो गई है।... और जो मैंने कहा उससे गीता अत्याधुनिक हो जाती है; बीसवीं सदी की घटना हो जाती है। अब पिछले पांच हजार साल को हम भूल सकते है। जो मैंने कहा है, उसने गीता के पुराने पड़ते रूप को एकदम अत्याधुनिक कर दिया। इन पांच हजार सालों में जो भी घटा है, मनुष्य की चेतना ने जो नई-नई करवटें ली हैं, नई-नई करवटें ली हैं, नई-नई विधाएं खोजी हैं, मनुष्य की चेतना ने जो नये अनुभव किए हैं, उन सबको मैंने समाविष्ट कर दिया है। अब गीता को नया खून मिल गया।

    Additional Information

    Publisher Divyansh
    ISBN 978-93-84657-63-5
    Shipping Option By Courier
    Type Books

    Product Tags

    Use spaces to separate tags. Use single quotes (') for phrases.