Shopping Cart Empty!

    More Views

    • Shunya Ki Kitab

    Shunya Ki Kitab [Books]

    Be the first to review this product

    Availability: Out of stock

    Rs. 395.00

    Quick Overview

    षून्य की किताब
    तुम ही मार्ग हो और तुम ही मंजिल हो, और तुम्हारे और मंजिल के बीच कोई दूरी नहीं है। तुम्हीं खोजी हो और तुम्हीं खोजे जाने वाले हो, खोजी और खोजे जाने वाले में कोई दूरी नहीं है; तुम्हीं उपासक हो और तुम्ही उपास्य हो। तुम्हीं षिष्य हो और तुम्हीं गुरु हो। तुम्हीं साधन हो और तुम्हीं साध्य होः यही महापथ है।
    वह सदा तुम्हें उपलब्ध था। इस क्षण भी तुम उसी में हो। जागे हुए, तुम उसमें हो। सो जाओ, तुम उसी में रहते हो, क्योंकि तुम नींद में हो इसलिए उसे देख नहीं सकते, और फिर तुम खोजना षुरू कर देते हो।

    पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुः
    ऽ स्ंाघर्ष ही मन का रोग है
    ऽ मौन का महत्व
    ऽ भौतिकवाद और अध्यात्मवाद का संतुलन
    ऽ निर्विचार होना द्वार है-- इसे कैसे उपलब्ध किया जाए?
    ऽ मन के दुष्चक्र से निकलने के उपाय
    ऽ तीसरी आंख के रहस्य
    ऽ तथाता का अर्थ

    Details

    Shunya Ki Kitab

    Additional Information

    Publisher Osho World Foundation
    ISBN 978-93-84657-66-6
    Type Books
    Manufacture Osho World Foundation

    Product Tags

    Use spaces to separate tags. Use single quotes (') for phrases.