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    • Kan Thore Kankar Ghane

    Kan Thore Kankar Ghane [Books]

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    Quick Overview

    कन थोरे कांकर घने
    बाबा मलूकदास--यह नाम ही मेरी हृदय-वीणा को झंकृत कर जाता है। जैसे अचानके वसंत आ जाए! जैसे हजारों फूल अचानक झर जाएं! नानक से मैं प्रभावित हूं; कबीर से चकित हूं; बाबा मलूकदास से मस्त। ऐसेषराब में डूबे हुए वचन किसी और दूसरे संत के नहीं हैं।
    नानक में धर्म का सारसूत्र है, पर रूखा-सूखा। कबीर में अधर्म को चुनौती है--बड़ी क्रांतिकारी, बड़ी विद्रोही। मलूक में धर्म की मस्ती है; धर्म का परमहंस रूप; धर्म को जिसने पीया है, वह कैसा होगा। न तो धर्म के सारतत्व को कहने की बहुत चिंता है, न अधर्म से लड़ने का कोई आग्रह है। धर्म की षराब जिसने पी है, उसके जीवन में कैसी मस्ती की तरंग होगी, उस तरंग से कैसे गीत फूट पड़ेंगे, उस तरंग से कैसे फूल झरेंगे, वैसे सरल अलमस्त फकीर का दिग्दर्षन होगा मलूक में।

    पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुः
    ऽ प्रेम की एकमात्र नीति है; और प्रेम ही एकमात्र चरित्र है
    ऽ समानुभूति का अर्थ
    ऽ जीवन में इतनी उदासी और निराषा क्यों है?
    ऽ धर्म का सार क्या है?
    ऽ प््रोम और त्याग मंे किसका महत्व बढ़ कर है?

    Details

    कन थोरे कांकर घने बाबा मलूकदास--यह नाम ही मेरी हृदय-वीणा को झंकृत कर जाता है। जैसे अचानके वसंत आ जाए! जैसे हजारों फूल अचानक झर जाएं! नानक से मैं प्रभावित हूं; कबीर से चकित हूं; बाबा मलूकदास से मस्त। ऐसेषराब में डूबे हुए वचन किसी और दूसरे संत के नहीं हैं। नानक में धर्म का सारसूत्र है, पर रूखा-सूखा। कबीर में अधर्म को चुनौती है--बड़ी क्रांतिकारी, बड़ी विद्रोही। मलूक में धर्म की मस्ती है; धर्म का परमहंस रूप; धर्म को जिसने पीया है, वह कैसा होगा। न तो धर्म के सारतत्व को कहने की बहुत चिंता है, न अधर्म से लड़ने का कोई आग्रह है। धर्म की षराब जिसने पी है, उसके जीवन में कैसी मस्ती की तरंग होगी, उस तरंग से कैसे गीत फूट पड़ेंगे, उस तरंग से कैसे फूल झरेंगे, वैसे सरल अलमस्त फकीर का दिग्दर्षन होगा मलूक में। पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुः ऽ प्रेम की एकमात्र नीति है; और प्रेम ही एकमात्र चरित्र है ऽ समानुभूति का अर्थ ऽ जीवन में इतनी उदासी और निराषा क्यों है? ऽ धर्म का सार क्या है? ऽ प््रोम और त्याग मंे किसका महत्व बढ़ कर है?

    Additional Information

    Publisher Osho World Foundation
    ISBN 978-81-7261-321-1
    Type Books
    Manufacture Osho World Foundation

    Product Tags

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