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    • Jyun Tha Tyun Thahraya

    Jyun Tha Tyun Thahraya [Books]

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    Quick Overview

    ज्यूं था त्यूं ठहराया
    मैं तो इतना ही चाहता हूं तुमसे कि तुम सारे पक्षपातों से मुक्त हो जाना। मेरी बातों को भी मत पकड़ना, क्योंकि मेरी बातें पकड़ोगे, तो वे पक्षपात बन जाएंगी। बातें ही मत पकड़ना।
    तुम्हें निर्विचार होना है। तुम्हें मौन होना है। तुम्हें षून्य होना है। तभी तुम्हारे भीतर ध्यान का फूल खिलेगा। ओर ध्यान का फूल खिल जाए तो अमृत तुम्हारा है, परमात्मा तुम्हारा है। एस धम्मो सनंतनो।
    और ध्यान का फूल खिल जाए, तो रज्जब की बात तुम्हें समझ में आ जाएगीः ज्यूं था त्यूं ठहराया! तुम वहीं ठहर जाओगे, तो तुम्हारा स्वभाव है। स्वभाव में थिर हो जाना इस जगत में सबसे बड़ी उपलब्धि है।

    पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुः
    ऽ संस्कार का क्या अर्थ है?
    ऽ जीवन में इतना विरोधाभास क्यों है?
    ऽ मैं ध्यान ‘क्यों’ करूं?
    ऽ यह जीवन क्या है? इस जीवन का सत्य क्या है?
    ऽ सत्य की कोई परंपरा नहीं होती
    ऽ भारत क्यों विज्ञान को जन्म नहीं दे पाया?

    Details

    ज्यूं था त्यूं ठहराया मैं तो इतना ही चाहता हूं तुमसे कि तुम सारे पक्षपातों से मुक्त हो जाना। मेरी बातों को भी मत पकड़ना, क्योंकि मेरी बातें पकड़ोगे, तो वे पक्षपात बन जाएंगी। बातें ही मत पकड़ना। तुम्हें निर्विचार होना है। तुम्हें मौन होना है। तुम्हें षून्य होना है। तभी तुम्हारे भीतर ध्यान का फूल खिलेगा। ओर ध्यान का फूल खिल जाए तो अमृत तुम्हारा है, परमात्मा तुम्हारा है। एस धम्मो सनंतनो। और ध्यान का फूल खिल जाए, तो रज्जब की बात तुम्हें समझ में आ जाएगीः ज्यूं था त्यूं ठहराया! तुम वहीं ठहर जाओगे, तो तुम्हारा स्वभाव है। स्वभाव में थिर हो जाना इस जगत में सबसे बड़ी उपलब्धि है। पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुः ऽ संस्कार का क्या अर्थ है? ऽ जीवन में इतना विरोधाभास क्यों है? ऽ मैं ध्यान ‘क्यों’ करूं? ऽ यह जीवन क्या है? इस जीवन का सत्य क्या है? ऽ सत्य की कोई परंपरा नहीं होती ऽ भारत क्यों विज्ञान को जन्म नहीं दे पाया?

    Additional Information

    Publisher Osho World Foundation
    ISBN 978-81-7261-319-8
    Type Books
    Manufacture Osho World Foundation

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