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    Ek Nai Manushata ka Janam

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    Ek Nai Manushata Ka Janam [Books]

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    Quick Overview

    नया मनुष्य, व्यवस्था के अनुसार या उसके हितों के अनुकूल होने नहीं जा रहा है। अपने बारे में उसे सम्मान, प्रतिष्ठा आदर और पूजा आदि इन सभी चीजों की कोई जरूरत होगी ही नहीं और पूरी तरह से उसकी कोई दिलचस्पी स्वयं के संबंध में नहीं होगी। जो व्यक्ति अंदर से खाली, खोखले होते हैं, उन्हीं को इस तरह की सजावट और अलंकरण की आवश्यकता होती है।
    -ओशो

    Details

    नया मनुष्य, व्यवस्था के अनुसार या उसके हितों के अनुकूल होने नहीं जा रहा है। अपने बारे में उसे सम्मान, प्रतिष्ठा आदर और पूजा आदि इन सभी चीजों की कोई जरूरत होगी ही नहीं और पूरी तरह से उसकी कोई दिलचस्पी स्वयं के संबंध में नहीं होगी। जो व्यक्ति अंदर से खाली, खोखले होते हैं, उन्हीं को इस तरह की सजावट और अलंकरण की आवश्यकता होती है।

    -ओशो

    Additional Information

    Publisher Divyansh
    ISBN 978-81-906947-5-9

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