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    Dhyan Yoga Pratham aur Antim

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    Dhyan Yoga: Pratham aur Antim Mukti [Books]

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    Quick Overview

    ‘ध्यानयोग प्रथम और अंतिम मुक्ति’ ओशो द्वारा सृजित अनेक ध्यान विधियों का विस्तृत व प्रायोगिक विवरण है। ध्यान में कुछ अनिवार्य तत्व हैः विधि कोई भी हो, वे अनिवार्य तत्व हर विधि के लिए आवष्यक है। पहली है एक विश्रामपूर्ण अवस्थाः मन के साथ कोई संघर्ष नहीं, मन पर कोई नियंत्रण नहीं; कोई एकाग्रता नहीं। दूसरा, जो भी चल रहा है उसे बिना किसी हस्तक्षेप के, बस शांत सजगता से देखो भर-शांत हो कर, बिना किसी निर्णय और मूल्यांकन के, बस मन को देखते रहो।
    ये तीन बातें हैः विश्राम, साक्षित्व, अनिर्णय।

    ओशो

    Details

    पुस्तक के मुख्य बिन्दु में ओशो सक्रिय ध्यान विधियों व ओशो मेडिटेटिव थेरेपीज़ का, जो कि आधुनिक जीवन के तनावों से सीधे निपटती हैं व हमें ताजा व उर्जावान कर जाती हैं। ओशो बहुत सी प्राचीन विधियों की भी चर्चा करते हैं: विपस्सना व झाझेन, केंद्रीकरण की विधियां, प्रकाश व अंधकार पर ध्यान, हृदय के विकास की विधियां....।

    विषय सूची

    पुस्तक में ओशो द्वारा बतायी गयी ध्यान विधियों को पांच खण्डों में विभाजित किया गया है।

    1. प्रथम खण्डः ध्यान के विषय में
    2. द्वितीय खण्डः ध्यान का विज्ञान
    3. तृतीय खण्डः ध्यान की विधियां
    4. चतुर्थ खण्डः ध्यान में बाधाएं
    5. पंचम खण्डः ओशो से ध्यान संबंधी प्रष्नोत्तर
    यह पुस्तक 296 पृष्ठ सहित सजिल्द कवर पेज में उपलब्ध है।

    Additional Information

    Publisher Osho World Foundation
    ISBN 978-81-7261-029-6
    Type Books
    Manufacture Osho World Foundation

    Product Tags

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