Shopping Cart Empty!

    Bhajgovindam Moondhmate

    More Views

    • Bhajgovindam Moondhmate
    • Bhajgovindam Moondhmate

    Bhajgovindam Moondhmate [Books]

    Be the first to review this product

    Availability: In stock

    Rs. 270.00
    OR

    Quick Overview

    ओशो द्वारा आदिशंकराचार्य के ‘भजगोविंदम् मूढ़मते’ पर दिए दस अमृत प्रवचन।

    इस पुस्तक में आदिशंकराचार्य की अद्वितीय कृति ‘भज गोविन्दम्’ पर बोलते हुए, ओशो कहते हैं,

    ‘‘इस मधुर गीत का पहला पद शंकर ने तब लिखा, जब वे एक गांव से गुजरते थे, और उन्होंने एक बूढ़े आदमी को व्याकरण के सूत्र रटते देखा। उन्हें बड़ी दया आई...धर्म व्याकरण के सूत्र में नहीं है, वह तो परमात्मा के भजन में है। और भजन, जो तुम करते हो, उसमें नहीं है। जब भजन भी खो जाता है, जब तुम ही बचते हो... बिना कहे तुम भजन हो जाओ, तुम गीत ही हो जाओ, इस तरफ शंकर का इशारा है।’’

    Details

    ओशो द्वारा आदिशंकराचार्य के ‘भजगोविंदम् मूढ़मते’ पर दिए दस अमृत प्रवचन।
    इस पुस्तक में आदिशंकराचार्य की अद्वितीय कृति ‘भज गोविन्दम्’ पर बोलते हुए, ओशो कहते हैं,
    ‘‘इस मधुर गीत का पहला पद शंकर ने तब लिखा, जब वे एक गांव से गुजरते थे, और उन्होंने एक बूढ़े आदमी को व्याकरण के सूत्र रटते देखा। उन्हें बड़ी दया आई...धर्म व्याकरण के सूत्र में नहीं है, वह तो परमात्मा के भजन में है। और भजन, जो तुम करते हो, उसमें नहीं है। जब भजन भी खो जाता है, जब तुम ही बचते हो... बिना कहे तुम भजन हो जाओ, तुम गीत ही हो जाओ, इस तरफ शंकर का इशारा है।’’

    Additional Information

    Publisher Rebel
    ISBN 978-81-7261-122-4

    Product Tags

    Use spaces to separate tags. Use single quotes (') for phrases.